मनिषियों के मत 7

बेदिल जी हमारे समाज के लिये वैसे ही हैं जैसे भगवान राम के लिये मुनी वशिष्ठ.

—श्री बनारसीदासजी गुप्त


हरियाणा प्रदेश के चरखी-दादरी में अग्रविभूषण श्री बनारसीदास जी गुप्त के कर कमलों से, ग्रंथ – लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित हुआ. इस अवसर पर आयोजित कविसम्मेलन में प्रखयात कवि- गजेन्द्र सोलंकी ने श्री अग्रसेन की महिमा का सस्वर सरस गान किया.

इस अवसर पर आज अचानक यहां ग्रंथ के दर्शन करके अत्यन्त प्रसन्नता अभिव्यक्त करते हुए आदरणीय श्री बनारसीदास गुप्त ने कहा- बरसों पहले इंदौर के अ. भा. अग्रवाल महाकुंभ में मेरी बेदिल जी से इस बारे में चर्चा हुई थी. प्रदीप मित्तल जी से भी चर्चा हुई थी. लेकिन फिर बेदिल जी का और ग्रंथ का कोई अता-पता ही नहीं लगा.

जो प्रसन्नता हुई है वह हमारी जीवन भर की साधना की सफलता है.

महामानव श्री अग्रसेन की महिमा गाथा के लिये अपना जीवन अर्पित कर दिया जिसने वो बेदिल जी अब हमारे समाज के लिये वैसे ही हैं जैसे भगवान राम के लिये मुनी वशिष्ठ.

– श्री बनारसीदास जी गुप्त